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सबसे उदास गीत – प्रो एम आर सेठी – पुस्तक समीक्षा

By vikrantsingh87377@gmail.com
April 30, 2021 3 Min Read
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सबसे उदास गीत पढ़ते हुए आपको लगता है कि आप एक महफिल से होकर आए हैं और एक बुफे हैं व्यंजनों का जिसके हर स्वाद को सलीके से बड़ी शिद्दत से पकाया और परोसा गया है। “ह्रदय और मस्तिष्क दोनों को तृप्त करते हुए व्यंजन” – ये ख्याल आता है हमें सबसे उदास गीत और अन्य कविताएँ पढ़ते हुए जो श्री एम. आर. सेठी जी द्वारा रचित है। सबसे उदास गीत में इतनी विस्तृत कविताएँ हैं जो कि जीवन को बहुआयामी सलीके से छूकर गुजर जाती है और इतनी सहजता के साथ एक ही पुस्तक में कवि ने पिरो दिया है, ये कोई सहज कार्य नहीं है बल्कि अपने आप में ये किताब एक अलग ही दुनिया है। पुस्तक के हर पृष्ठ में बहुत सी भावनाएँ छुपी है और बहुत से गहरे घाव भी है। किसी वेदना का दर्शन कराती हुई ये कविताएँ, आपको यकायक की यादों के सागर में डूबा देंगी और एक पुराना इतिहास दोहरा जाएँगी। आपकी जीवन की खट्टी मीठी यादों को ताजा कर जाएँगी। सेठी जी मूलभूत रूप से अंग्रेजी में लिखते हैं और ये बात वो खुद भी इस किताब में कह रहे हैं कि  हिंदी भाषा में ये उनका पहला प्रयोग है, किंतु आपको कहीं से भी ये पुस्तक और इसकी कविताएँ पढ़ते हुए ये प्रतीत नहीं होगा कि श्री एम. आर. सेठी जी की ये पहली हिंदी पुस्तक है। सभी रंगों से सजी ये पुस्तक काव्य प्रेमियों के लिए स्वयं में संपूर्ण है। भिन्न भिन्न रस से लबरेज ये पुस्तक हँसाती है, रुलाती है और निशब्द कर जाती है। किसी कविता प्रेमी के लिए ये एक बहुत अच्छी पुस्तक है।

“सबसे उदास गीत” शीर्षक देख कर पहले पहल पाठक थोड़ा सकुचा सकता है कि क्या ये पुस्तक उदास गीतों का ही संग्रह है लेकिन नहीं बहु आयामी रंग लिए ये एक उत्तम लेखनी से लिखी गई एक अति प्रोण व् परिवक्व कृति है । “तेरी पायल”, “सावन” और “पायल पहन कर न आया करो” शीर्षक प्रेम को बारीक तरीके से प्रकट करते हैं तो वहीं “मौन किनारे” और “गहन अंधेरा” शीर्षक जैसे स्तब्ध कर जाते हैं । “अलविदा कहने के बाद” और “जो कहते थे” ग़ज़लें आप गुनगुनाते रह जायेंगे। और भी ग़ज़लें दिल को छू लेने वाली है ।

ग़ज़लों तक आते आते आप कवि को बहुत ही गंभीर रूप से रूबरू होते हैं तो उसके तुरंत बाद ही श्री सेठी जी की हास्य व्यंग की कविताएँ पढ़कर आप मंद मंद मुस्काने पर विवश हो जायेंगे। कविताएँ, ग़ज़लें और हास्य कविताएँ एक ही पुस्तक में है जो कि एक पूरा पैकेज जैसा है पाठकों के लिए। इतनी मनोरंजक कविताएँ जो कि गुदगुदा जाती है और वहीं गहरी वेदना भी दे जाती है। जब आप इस पुस्तक की ग़ज़लें पढ़ते हैं तो जैसे किसी सुनहरे बीते समय की झलक सी दे जाती हैं ये ग़ज़लें। आप इन्हें गुनगुना सकते हैं, किसी प्रेमी को समर्पित कर सकते हैं और खुद भी आनंदित हो सकते हैं।

अंत में, ये पुस्तक सभी काव्य रस को पीने के शौकीन लोगों के लिए एक अद्भुत कृति हो सकती है, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे कि क्या मजेदार सफर से अभी अभी आए हैं।

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Book ReviewsM R Sethi BookSabse Udaas Geet
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vikrantsingh87377@gmail.com

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